जैसे विचार, वैसा जीवन (As A Man Thinketh) – Hindi”PDF – Free Download

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जैसे विचार, वैसा जीवन (As A Man Thinketh) ”PDF Deatils

जैसे विचार, वैसा जीवन (As A Man Thinketh)

PDF Title: As A Man Thinketh
Hindi Title: जैसे विचार, वैसा जीवन
Total Page: 29 Pages
Author: James Allen
PDF Size: 847 KB
Language: Hindi
Source: jamesallen.com
PDF Link: Available

जैसे विचार, वैसा जीवन (As A Man Thinketh) – Hindi PDF description

हमारा mind एक बगीचे की तरह होता है। बगीचे को सुंदर बनाने के लिए, उसमें उगी खराब घास को, बाहर से आए जंगली जानवरों को, हटाना होता है। पौधों को पानी देना होता है। कुछ को काटकर तरसना पड़ता है। सबसे खास बात लगातार बगीचे का निरीक्षण करना पड़ता है। Aware रहना पड़ता है। बिल्कुल इसी तरह, हमको अपने mind की देखभाल करनी होती है। Mind में आ रहे, negative thoughts को हटाना होता है। अच्छे thoughts को बढ़ाना होता है। उन्हें तराशना होता है।

डर, ईर्ष्या, नफरत, लालच जैसी भावनाओ से mind को बचाना होता है। लगातार ध्यान रखना पड़ता है। Aware रहना पड़ता है। देखना होता है कि mind में क्या चल रहा है। हमारे आसपास के environment व माहौल की वजह से, हमारे विचार बनते हैं। विचार ही हमारा character बनाते हैं। इसका मतलब, यह बिल्कुल भी नहीं है। आप गरीब घर में पैदा हुए। इसलिए जिंदगी भर गरीब बनकर ही रह गए। हमारी परिस्थितियों से ही हमारी सोच बनती है। लेकिन thought process पर ध्यान देकर। हम इसे change कर सकते हैं।

ऐसा करने से हमारा character पूर्णतया change हो जाएगा। बस सीखना होगा। Thought process को जानना होगा। यह समझना होगा। कि सभी में एक समान शक्तियां मौजूद हैं। बस उसे हासिल करना होगा। सोच बदलते जाओगे, circumstances अपने आप बदलते  जाएंगे। हर thoughts रूपी बीज या तो हमने बोया होता है। या फिर हमने खुद ही, उसे mind में आने दिया है। उसने हमारे mind में, अपनी जड़ें जमा ली हैं।

अब कभी न कभी वह बीज बड़ा भी होगा। उसमें फल भी लगेंगे। अगर thoughts अच्छे होंगे। तो आपको अच्छा फल मिलेगा। बुरे thoughts होंगे, तो बुरा फल मिलेगा। हम वह attract नहीं करते हैं। जो हम चाहते हैं। हम वह attract करते हैं। जो हम हैं। मतलब, हम खुद को जो मान लेते हैं। वही बन जाते हैं। प्रॉब्लम यहीं पर आती है। हम परिस्थितियों को तो बदलना चाहते हैं। लेकिन खुद को नहीं।

मानसिक शांति बुद्धिमत्ता का सुंदर रत्न है। जिस तरह मोती की खोज में गोताखोर को गहरे पानी में जाना होता है, उसी तरह मानसिक शांति का यह रत्न भी आसानी से नहीं मिलता है। यह आत्म-नियंत्रण के लंबे और धैर्यवान प्रयासों का परिणाम होती है। मानसिक शांति परिपक्क अनुभव की निशानी है। इससे पता चलता है कि वह व्यक्ति नियमों और विचार प्रक्रियाओं को सामान्य से ज़्यादा अच्छी तरह समझता है।

इंसान उसी हद तक शांत रहता है, जिस हद्द तक वह यह मानता है कि उसका जीवन उसके विचारों का परिणाम है। इस ज्ञान के लिए यह समझना भी जरूरी है कि दूसरों की परिस्थितियाँ और व्यक्तित्व भी उनके विचारों के परिणाम हैं।

जब उसमें सही समझ आ जाती है और कारण तथा परिणाम के नियम की मदद से वह चीजों के आंतरिक संबंधों को ज़्यादा स्पष्टता से देख लेता है, तो वह बात का बतंगड़ नहीं बनाता, विचलित नहीं होता,

चिंता नहीं करता और दुखी नहीं होता। वह हर स्थिति में संतुलित और शांत बना रहता है। शांत व्यक्ति खुद पर शासन करना सीख लेता है, इसलिए वह दूसरों के ता रूप ढलने का तरीका जानता है। और दूसरे लोग उसकी आत्मिक शक्ति के कायल होते लता वे महसूस करते हैं कि वे उससे सीख गा ई और उस पर भरोसा कर सकते हैं।

इंसान जितना ज़्यादा शांत होता है, उसकी सफलता, प्रभाव और नेकी करने की शक्ति उतनी ही ज़्यादा बढ़ती है। सामान्य व्यापारी भी अगर ज़्यादा आत्म-नियंत्रण और शांति विकसित कर ले, तो उसकी व्यापारिक समृद्धि बढ़ जाएगी, क्योंकि लोग हमेशा शांत व्यक्ति के आस-पास रहना चाहते हैं।

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